क़िताब के पन्ने पलटकर सोचता हूँ
यूँ पलट जाए ज़िंदगी तो क्या बात है

तमन्ना जो पूरी हो ख्वाबों में
हक़ीक़त बना जाए तो क्या बात है

कुछ लोग मतलब के लिए ढूंढ़ते हैं मुझको
कोई दोस्त बनकर आए तो क्या बात है

क़तल करके तो ले जाएंगे दिल मेरा
कोई नज़रों से चुराए तो क्या बात है

जो शरीफों की शराफत में बात न
होएक भंवरा कह जाए तो क्या बात है

ज़िंदा रहने तक तो खुशी दूंगा सबको यारो
अगर मेरी मौत से खुशी मिले किसी को तो क्या बात है

(अज्ञात)

8 प्रतिक्रियाएँ:

amritwani.com ने कहा…

bahut sundar rachana

shekhar kumawat


http://kavyawani.blogspot.com/

शुभम जैन ने कहा…

areee wah bahut hi sundar gazal...kya baat hai...

Dev ने कहा…

बहुत खूबसूरत लब्जों से नवाज़ा है
प्रशंसनीय

EKTA ने कहा…

wah kya baat hai...

संजय भास्कर ने कहा…

भावों को इतनी सुंदरता से शब्दों में पिरोया है
सुंदर रचना....

Sanjay kumar
http://sanjaybhaskar.blogspot.com

kshama ने कहा…

कुछ लोग मतलब के लिए ढूंढ़ते हैं मुझको
कोई दोस्त बनकर आए तो क्या बात है
Wah ! Kya baat hai..! Bahut khoob!

अल्पना वर्मा ने कहा…

waah!bahut achchhee gazal likhi hai aap ne.

anjana ने कहा…

बहुत ही अच्छी गजल

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