सदा ग़म ही मिले, कभी ख़ुशी नहीं आई
हमने जब भी पुकारा, ज़िंदगी नहीं आई

रोज़ देखते हैं हम साथ रहने का ख़ाब
कभी जो हसरत की, हमनशीं नहीं आई

नसीब है किसी को यहाँ उम्रभर का ग़म
उम्र गुज़र गया हमें कभी बेरुखी नहीं आई

वो बात जो कहा था कभी देखके तुझे
उस बात का असर है, मुझे बेखुदी नहीं आई

4 प्रतिक्रियाएँ:

kshama ने कहा…

Rachana ka bhaawaarth bahut sundar hai...wartani me chand galtiyan hain...jaise 'baat' yah shabd stree ling me istemaal hota hai!

Ram Krishna Gautam ने कहा…

Dastak Dene ke lie bahut-bahut abhar KSHAMA Ji... Vartani sudhar ke lie vishesh dhanyavaad...


Regards

Ram K

Udan Tashtari ने कहा…

बेहतरीन!

अल्पना वर्मा ने कहा…

bahut dino baad aap ne post likhi hai.
achchee rachna hai .
Pahla sher bahut badhiya laga.
सदा ग़म ही मिले, कभी ख़ुशी नहीं आई
हमने जब भी पुकारा, ज़िंदगी नहीं आई
bahut bahut khuub!

Feeds

Related Posts with Thumbnails