जब दिन निकला
तुम याद आएजब सांझ ढली
तुम याद आए
जब चलूँ अकेले
तन्हा मैं
सुनसान सड़क के
बीचों बीच
धड़कन भी जोरों
से भागे
लगता मुझको
कि यहीं कहीं
अब भी तुम हो
मेरे आसपास
जब कोयल
मेरे कानों में
एक मधुर सी तान
सुना जाएलगता मुझको ऐसा जैसे
तुम याद आएतुम याद आए

0 प्रतिक्रियाएँ:

Feeds

Related Posts with Thumbnails